लड़कियों.. कुछ सवाल अपने पुरुष रिश्तेदारों से पूछो!


लड़की हो तन ढक कर रखो… लड़की हो नजरें नीची रख कर चलो… लड़की हो चौका-बरतन और सिलाई-कढ़ाई सीख लो…. लड़की हो बुजुर्गों के सामने सर ढक कर रखो ये करो वो करो और ना जाने क्या-क्या…

लड़कियों के लिए ये आम बात है मगर सोचिए कि कैसा लगेगा जब लड़कों को रोज़ ऐसी नसीहतें सुनने को मिलेंगी? आज मेरी एक छोटी सी गुजारिश सभी लड़कियों से है कि जाकर कुछ सवाल अपने पुरूष रिश्तेदारों (पिता, भाई, दोस्त, प्रेमी या कोई और) से पूछें कि…

  • कभी उनको बाजार में अकेले जाने में डर लगा है?
  • क्या घर से बाहर जाते समय खुद की रक्षा के लिए अपनी छोटी बहन को साथ ले गए है? जो कि आमतौर पर लड़कियों को करने के लिए कहा जाता है|
  • क्या कभी किसी लड़की ने राह चलते उनके शरीर को गलत तरीके से छुआ है?
  • क्या उनको रात ढलने से पहले घर लौटने की हिदायत दी गई है?
  • क्या सुनसान रास्ते पर जाते समय खुद के बलात्कार होने का डर लगा है?
  • क्या भीड़ में जाने से पहले मन में ये सवाल आता है कि कहीं उनके गुप्तांगों के साथ कोई लड़की छेड़खानी तो नहीं करेगी?
  • क्या कभी डर लगा कि कहीं अकेला पाकर लड़कियों का झुण्ड गाड़ी में उसको उठा तो नहीं ले जाएगा?
  • क्या अंधेरे और सुनसान रास्ते में खड़े होकर किसी अनहोनी होने के डर से सांसे फूली हैं?
  • कैब में जाते समय ड्राईवर द्वारा कुछ आपत्तिजनक हरकत किए जाने का डर लगा है?
  • किसी अनजान लड़की द्वारा गलत छुअन के कारण गुस्सा आया है या फिर दुख हुआ कि काश छुअन कुछ देर और होती?
  • क्या कभी पत्नी की मौत के बाद रंगीन कपड़े पहनने से रोका गया है?
  • क्या कभी अपनी पूर्व प्रेमिका से एसिड अटैक का डर लगा है?
  • क्या कभी आपको जींस या शाट्स पहनने से रोका गया या तन ढकने को बोला गया?
  • क्या कभी शराब पीकर पत्नी ने खाना समय पर न मिलने के कारण लोहे के रोड से पीटा है?

मैं लड़कों से पूछती हूँ कि क्या आपने कभी ऐसी हालातों में खुद को पाया है? हम लड़कियां हर रोज़ ऐसे ना जाने कितने हालातों से दो चार होती है। क्या लड़कों ने ऊपर लिखी किसी भी घटना को कभी महसूस करके समाज़ के ताने सुने हैं या आपको घर की चार-दीवारी में कैद होने को मज़बूर किया गया? बहुत सारे प्रश्न हैं जिनका जवाब लड़कों को देना है, इस समाज को देना है|

ऊपर लिखी बातें कोई फिल्म की कहानी नहीं है और ना ही सोशल मिडिया में फैमेनिज्म़ को बढ़ावा देने का कोई लेख है। ये हमारे समाज की वो कड़वी सच्चाई है जिसे पुरूषों ने समझा तो दूर इसे कभी महसूस तक नहीं किया। आपको बिल्कुल वही जवाब मिलेगा जो आप इस वक्त सोच रहीं हैं…तो फिर आपने लड़की हो कर इनके घर में पैदा होकर कोई गुनाह तो नहीं किया ना… लड़कियों को चाहिए कि वे अपने भाई, पिता या पुरुष दोस्त को बताएं जो वे रोज झेलती हैं। वे जरूर समझेंगे और खुद को हम लड़कियों की जगह रख कर सोचेंगे। लड़कियां अब उस रुढिवादी जंजीर को तोंड़े जिसमें जकड़ने के लिए वे पैदा ही नहीं हुईं…

यह लेख लिखा है प्रीति नहार ने जो राज्य सभा टीवी में पत्रकार हैं। 


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