नर्मदा घाटी की हजारों महिलाओं ने लिया संकल्प, बिना पुनर्वास डूब नामंजूर

नर्मदा आंदोलन की महिलाएं

नर्मदा घाटी के हजारों भाई-बहनों, किसानों, मजदूरों ने इकट्ठा होकर बड़वानी में संकल्प किया. नर्मदा बचाओ आंदोलन की आगुवाई कर रही हजारों महिलाएं एकजुट हुईं. सरदार सरोवर में 139 मीटर तक पानी भरने का हठग्रह, जो गुजरात और केंद्र सरकार मिलकर आगे बढ़ा रही है, उसका विरोध करते हुए सभी ने संकल्प व्यक्त किया है कि डूब क्षेत्र में 32,000 परिवार हमारी प्रकृति, संस्कृति और नदी को बरबाद नहीं होने देंगे.

संकल्प सभा में जुटे करीबन 7000 लोगों ने कहा बर्गी, महेश्वर, ओंकारेश्वर, जोबट बांधो के विस्थापितों का भी पुनर्वास नहीं हुआ है राजकुमार सिन्हा ने कहा कि झूठे दावों की पोल-खोल हो चुकी है.नर्मदा में विकेन्द्रित जल नियोजन की दिशा ही लेनी होगी. यही नर्मदा आंदोलन की सीख है. सौराष्ट्र से पधारे गुजरात के भूतपूर्व पर्यावरण मंत्री प्रवीण सिंह जाड़ेजा ने गुजरात की ओर से नर्मदा आंदोलन की माफी मांगते हुए कहा कि हम, जो गुजरात के कच्छ, सौराष्ट्र के नाम पर पानी मांगते रहे और सरदार सरोवर का समर्थन किया तो, गलत साबित हुए हैं और नर्मदा बचाओ आंदोलन ने उठायी हर बात सच साबित हुई है. गुजरात और केंद्र की सरकार न विस्थापितों के पक्ष में हैं, न ही किसानों के पक्ष में हैं !

कच्छ से पधारे भरत पटेल और गजुबा का सम्मान हुआ। नर्मदा घाटी के साथियों की विश्व बैंक के सामने हुई 1993 की जीत के बाद यह जीत भी दुनिया में बड़ी है और इससे विश्व बैंक को जनतंत्र के समक्ष झुकना पड़ा है. डॉ. सुनीलम और आराधना भार्गव जी के वक्तव्यों से लोगों को बल मिला. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी जन संगठनों को इस पर साथ देना जरूरी है.

सुनीलम जी ने सुरेन्द्र सिंह बघेल के सच्चे, हिम्मतवान वक्तव्य की सराहना की. चिन्मय मिश्र जी, जो मध्यप्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चुने गये हैं, उन्होंने सभी के समक्ष बात रखते हुए आंदोलन को 34 साल पूरे होने के लिए बधाई दी. संजय मंगला गोपाल, उर्जा विशेषज्ञ , परिणीता दांडेकर , दक्षिण एशियाई नदी, बांध ओर लोगों पर शोधकर्ता और राजेन्द्र रवि, सभी ने नर्मदा घाटी के सभी बांधो पर जनसुनवाई की. परिणीता दांडेकर ने कहा कि अमरीका ने आज तक 1000 से अधिक बांधों को तोड़कर नदियों को खुला किया है.

राजेन्द्र रवि जी ने विकास के विकल्पों को आगे बढ़ाने का ऐलान किया ताकि प्राकृतिक संसाधन बचा सके जिससे नदी भी बहती रहेगी. मुदिता विद्रोही और स्वाती देसाई गुजरात के विकास मॉडल की विकृति बताते हए कहा कि गुजरात के लोग भी अब समझ गये हैं कि उन्हें नर्मदा का मृगजड़ दिखाया गया और आंदोलन की बात ही सत्य है. औरंगाबाद से, चौपडा (जलगांव) से, इंदौर और भोपाल से आए साथी समर्थकों ने भी आंदोलन का अभिनंदन किया!

इंदौर से अशोक दुबे जी, प्रमोद बागड़ी जी, अतुल लागू जी सभी ने मध्यप्रदेश शासन ने भी गुजरात के सामने दी हुई चुनौती की तारीफ़ की. मान, जोबट, माही और गंजाल – मोरंड परियोजननाओं के साथियों ने भी अपनी आवाज उठायी.


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