मेरा रंग की टीम

शालिनी श्रीनेत, संस्थापक मेरा रंग फाउंडेशन ट्रस्ट
शालिनी श्रीनेत
शालिनी श्रीनेत

शालिनी श्रीनेत का बचपन देवरिया के पैतृक गांव तथा गोरखपुर की एयरफोर्स कालोनी में बीता। शादी के बाद पेशे से पत्रकार अपने लाइफ पार्टनर दिनेश श्रीनेत के साथ कई शहरों में रहीं- गोरखपुर, इलाहाबाद, बरेली, लखनऊ, बैंगलौर, कानपुर से होते हुए अब दिल्ली में निवास। बचपन में प्रधान पिता स्व. नारायण सिंह के साथ बहुत करीब से उनकी सामाजिक गतिविधियों को देखा और उससे प्रभावित भी हुईं।

शालिनी ने गोरखपुर यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएशन और रुहेलखंड विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। मूक-बधिर बच्चों के लिए काम करने वाले दो स्वयंसेवी संगठनों ‘जीवनधारा’ और ‘दिशा’ से जुड़ी रहीं और कुछ समय अपना बिजनेस भी किया। सन् 2016 में ‘मेरा रंग’ की अनौपचारिक शुरुआत वीडियो इंटरव्यू के माध्यम से हुई। यह प्रयास बहुत पसंद किया गया और मेरा रंग शीघ्र ही काफी लोकप्रिय हो गया। मेरा रंग अब एक रजिस्टर्ड संस्था है और शालिनी ने जेंडर, स्त्री सुरक्षा, एलजीबीटी से जुड़े कई मुद्दे अपने वीडियो इंटरव्यू के माध्यम से उठाए।

शालिनी ने आईआईटी दिल्ली, विवेकानंद कॉलेज-नई दिल्ली, सत्यवती कॉलेज- नई दिल्ली, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गंगोत्री देवी महाविद्यालय, गोरखपुर, मेवाड़ इंस्टीट्यूट- गाजियाबाद में विद्यार्थियों के बीच जाकर जेंडर संबंधी व्याख्यान दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने एनडीटीवी, ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर की पिंक कप टी, दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल, प्रेमचंद साहित्य संस्थान गोरखपुर, जेंडर संवाद शिवहर बिहार जैसे मंचों से भी अपनी बातें लोगों के साथ साझा की हैं। उन्होंने गाजियाबाद व गोरखपुर में ‘मेरी रात मेरी सड़क’ आंदोलन का सफलतापूर्वक संचालन किया। ‘मेरा रंग संवाद’ के माध्यम से भी उन्होंने गाजियाबाद तथा गोरखपुर में घरेलू हिंसा तथा जेंडर के मुद्दे पर लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया है।

सीरज सक्सेना, सलाहकार
सीरज सक्सेना
सीरज सक्सेना

सीरज सक्सेना एक चित्रकार, सिरेमिक कलाकार, ग्राफिक कलाकार हैं। वे वर्तमान में दिल्ली में एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं। सीरज ने पोलैंड, लंदन, सर्बिया, लिथुआनिया, नेपाल, स्पेन और भारत जैसे कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समूह कला प्रदर्शनियों और सिरेमिक कला संगोष्ठियों में भाग लिया है।

सीरज हिंदी में तीन पुस्तकों, ‘सिमिट-सिमिट जल’, ‘आकाश एक ताल है’ और ‘कला की जगहें’ – के लेखक हैं। उनके लेख हिंदी पत्रिकाओं और दैनिक समाचार पत्रों जैसे जनसत्ता, दैनिक भास्कर और अमर उजाला आदि में प्रकाशित होते रहते हैं। वे मेरा रंग फाउंडेशन के सलाहकार मंडल में शामिल हैं। सीरज एक साइकिलिस्ट भी हैं और पर्यावरण, कला शिक्षा और दैनिक जीवन में सौंदर्यशास्त्र के महत्व के लिए सतत जागरुक रहते हैं। उनका मानना ​​है कि कला जीवन के कल्याण को बढ़ाती है। उनके लिए कला अहिंसा, शांति, प्रेम और करुणा के साथ जीने का तरीका है।

आनंद वेदांत, सलाहकार
आनंद वेदांत
आनंद वेदांत

आनंद वेदांत एक योग शिक्षक, प्राकृतिक जीवन पद्धति के समर्थक तथा पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय सोशल एक्टीविस्ट हैं। वे गाजियाबाद की हिंडन नदी के संरक्षण के लिए बीते कई वर्षों से लगातार काम कर रहे है। सामुदायिक विकास के क्षेत्र में भी उनका काफी योगदान रहा है। गाजियाबाद के निकट सुराना गांव में भी पर्यावरण, आर्गेनिक खेती तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनका काफी सहयोग रहा है। वे अपनी कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को योग तथा स्वस्थ जीवन शैली के बारे में शिक्षित करते हैं। वे मेरा रंग फाउंडेशन के सलाहकार मंडल में शामिल हैं तथा गाजियाबाद क्षेत्र में होने वाली संस्था की गतिविधियों के संयोजक भी हैं।

 

भास्कर अग्रवाल, सलाहकार
भास्कर अग्रवाल
भास्कर अग्रवाल

भास्कर अग्रवाल पेशे से अधिवक्ता होने के साथ-साथ एक सोशल एक्टीविस्ट भी हैं। वे हेल्पिंग ह्यूमन के नाम से एक संस्था चलाते हैं जो कई मुद्दों पर लोगों की कानूनी तरीके से मदद करती है। इसमें घरेलू हिंसा, पुलिस उत्पीड़न, श्रमिक उत्पीड़न, सरकार महकमों में भ्रष्टाचार, मानसिक रोगियों, बुजुर्गों या बच्चों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना शामिल है। उन्होंने कई जन हित याचिकाओं तथा आरटीआई के माध्यम से भी सामान्य जीवन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है। वे मेरा रंग फाउंडेशन के कानूनी सलाहकार भी हैं तथा मेरा रंग फाउंडेशन के पास आए घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों को भी देखते हैं।

 

मनीष मिश्र, सलाहकार
मनीष मिश्रा
मनीष मिश्रा

मनीष मिश्र पेशे से पत्रकार हैं। कॅरियर की शुरुआत टीवी जर्नलिज्म से करने के बाद वे हरिभूमि, दैनिक हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण आदि समाचारपत्रों से जुड़े। वर्तमान में वे दैनिक जागरण, नोएडा में कार्यरत हैं। पत्रकारिता के अलावा मनीष की दिलचस्पी राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों तथा सिनेमा में हैं। वे मेरा रंग सलाहाकार मंडल के सदस्य हैं।