सोनी पाण्डेय की कविता ‘कुछ प्रेम कहानियां’

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सोनी पाण्डेय

आप नहीं समझ सकते एक स्त्री के प्रेम में होने की स्थिति को
वह सब कर सकती है जीवन में
वह कपड़े फाड कर चीख -चिल्ला सकती है
दुनिया सह लेगी

नहीं कह सकती तो बस प्रेम की बात

वह डरती है छूने से प्रेमी की परछाईं को और मन्नतें मानती है कि वह दूर रहे उसकी नज़रों से…
मेरी दुनिया में सबसे बड़ा अपराध है एक औरत का प्रेम में होना

वह सब्जी काटते, काट लेती हैं उंगली
बहते हुए खून में डूबो कर दर्द को दर्ज करती है आत्मा में प्रेम की चुभन
रोटी बनाते जला लेती है हाथ और फफोलों में पानी की तरह भर कर सहेजती है प्रेम
रास्ता चलते टकरा जगती है किसी गैर से और चुभती नज़रों से दो गाली सुनकर लौटती है घर…

कितना यातनापूर्ण है किसी औरत का प्रेम में होना मेरी दुनिया में

देखती हूँ और गले तक हलाहल भरे इन औरतों से पूछती हूँ
कैसे सहन कर लेती हो इतनी जलन?
स्याह निशानों पर कैसे चढ़ाती हो मेकअप की परत?
कैसे सो लेती हो रात भर?

हँसना तो सबसे मुश्किल होता होगा तुम्हारे लिए?…

मेरे अनगिन सवालों के घेरे में
घूमती हैं प्रेम करती हुई औरतें
यह मरखप गयीं किसी कोने…अतरे में पड़ी
सड़गल गयीं इनकी यादें घर के इतिहास में…

मुझे कुरेदती हैं यह प्रेमिकाएँ मेरे गाँव की
किसी डीह थान पर सीमेंट के चौरे में कैद की गयीं यह औरतें
किसी सोखा के लबदे के सैकड़ों निशाना लिए पीठ पर
घूमतीं हैं आज भी उजाली रातों में
गाँव के बाहर खुले सिवान में
गातीं हैं लग कर एक दूसरे के गले मातमी गीत

इनके रोने की आवाज सुनतीं है लड़कियाँ
डरतीं हैं प्रेम करने से…

सोनी पाण्डेयहिंदी की चर्चित कथाकार, कवयित्री व आलोचक डा.सोनी पाण्डेय आजमगढ़ से हैं। सन् 2014 में उनका कविता संग्रह ‘मन की खुलती गिरहें’ तथा 2018 में कहानी संग्रह ‘बलमा जी का स्टूडियो’ प्रकाशित हुआ। उन्होंने निराला के कथा साहित्य पर पीएचडी की है। हंस, कथादेश, पाखी, पूर्वग्रह, इंद्रप्रस्थ भारती, अहा जिंदगी समेत कई पत्रिकाओं में तथा हिंदी समय, स्त्रीकाल, अनुनाद जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।

कविता के साथ दी गई तस्वीर अमेजन से साभार