एकता नाहर की कविता ‘सपाट सीने वाली लड़कियाँ’

Poems by Ekta Nahar

एकता नाहर

सपाट सीने वाली लड़कियाँ हर जगह से ठुकराई गयीं

रिश्ते की बात करने आए लड़के वालों ने
जब नजर भर के उसे देखा तो फिर
उसका कोई और हुनर मायने न रहा

पुलिस की नौकरी में चुने जाने से भी,
संघ लोक सेवा आयोग ने शर्तों में लिखा है
कि कितने इंच का होना चाहिए सीना

किसी चित्रकार ने अपने खूबसूरत चित्रों में
जगह नहीं दी उस स्त्री को
जिसके सीने पे उभार न था
चित्र बनाने के लिए सुडौल शरीर का बिम्ब सबसे आकर्षक था

आए दिन देखा तिरस्कार
सहेलियों के चुटकुलों में, पति की नज़रों में
अंतरंग क्षणों में भी वो प्रेमी के सामने सहमी-सहमी सी रही
कभी खुद को ही आईने में देख हुई शर्मिंदा
कभी पैडेड ब्रा में छिपाती रही खुद से खुद को ही

उसके लिए छाती पर दुपट्टा डालना
भरे बदन वाली लड़की जितना ही जरूरी था
ताकि वो बचा सके खुद को उस पर हंसती हुई लालची नज़रों से
हाँ, भरे बदन का मतलब भरी हुई छातियों से ही है शायद

एकता नाहर पत्रकारिता और लेखन से जुड़ी हैं। उनका एक कविता संग्रह आ चुका है ‘सूली पर समाज’। वे दतिया मध्य प्रदेश से हैं।


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