पूनम लाल की कविता ‘लड़कियां’

Three Girls: A Painting by Amita Dand
Three Girls: A Painting by Amita Dand

पूनम लाल

अपने हिस्से की ज़मीन और
अपने हिस्से का आसमान
तलाशती
अपनी शर्तों पर जीती लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं…

जो अपने हिस्से की धूप से
राहत बिखेर जाती हैं
जो अपने हिस्से की हवा से
सुकून भर जाती हैं
मुझे अच्छी लगती हैं

सुबह से शाम तक
काम में खटती लड़कियां
फिर भी कभी न
कुम्हलाती लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं

कपास सी हल्की भावनाओं में
चट्टानों सी अडिग निर्णयों में
पल में रोती पल में हंसती
ये सतरंगी लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं

पानी की तासीर सी
कभी भाप बन तपाती
कभी बर्फ बन सहलाती
नदी-सी जीवनदाई लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं

गिरती-संभलती
जीवन रण में लड़ती
चटके जीवन दर्पण में भी
खुद को संवारती लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं

जो न माने कभी हार
हों कितने भी चक्रवात
धारा के विपरीत चलती
जुझारू लड़कियां
मुझे अच्छी लगती हैं


2 टिप्पणी

  1. मेरा रंग बहुत ही खूबसूरत और दर्पण सा दमकता हुआ है.. साधुवाद???
    मैं भी अपनी कुछ रचनाएँ भेजना चाहती हूँ, कैसे भेजूं? कृपया बताएं.
    धन्यवाद??

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