चंद्रकांता की दो कविताएं : ‘आई ऑबजेक्ट मी लॉर्ड !’ और ‘फूलन देवी बन जाओ’

चंद्रकांता की कविताएं

चंद्रकांता की कविताओं के बारे में बजरंग बिहारी तिवारी कहते हैं, “बतौर रचनाकार चंद्रकांता का रेंज बड़ा है। उन्हें किसी एक सरणि अथवा कोटि में सीमित करके देखना ठीक नहीं। वे हाशिए पर धकेल दी गई कराहती मानवता का दर्द सुनती हैं। वे यथार्थ की ऊपरी परत भेदकर सच के स्रोत तक पहुँचने का जतन करती हैं। जिन्हें हाशिए से भी बाहर रखा गया है उन समूहों, इंसानों तक उनकी निगाह जाती है।” पालमपुर, हिमाचल प्रदेश की युवा लेखिका और नैरेटर चंद्रकांता का पहला कविता संग्रह आई ऑब्जेक्ट I Object 2020 में प्रकाशित हिंदी व अंग्रेजी का द्विभाषी कविता संग्रह है। प्रस्तुत है उनकी कुछ कविताएं।

आई ऑब्जेक्ट मी लार्ड !

माननीय कोर्ट का निर्णय आया है –
बलात्कार का फलां केस ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ है

मी लार्ड!

बलात्कार मतलब ‘बलात-अधिकार’
यह साफ तौर पर बर्बरतापूर्वक की गई यौन हिंसा है
इस बर्बरता की डिग्री नापना
एक अजीब सी बात लगती है
लगता है सिस्टम की कोई मजबूरी है
वरना हिंसा कम बरती गयी हो या अधिक
एक ‘स्त्री की मर्जी’ सबसे जरूरी है ।

मी लार्ड !

हमारे यहाँ सत्तर साल की बूढ़ी
दो माह की नवजात
गर्भवती, ब्याहता या बदजात
और मृत महिलाओं का भी
शील भंग कर दिया जाता है
बिस्तर पर जात-धरम
या मज़हब की नहीं है औकात
खाट पर काली-गोरी सब योग्य हैं
मर्दवाद के लोकतंत्र में
सभी औरतें समान रूप से भोग्य हैं

मी लार्ड!

भंवरी देवी हो या फूलन
कठुआ हो या शक्ति मिल
पितृसत्ता नहीं करती खेद
समाज में सहज स्वीकृत है
स्त्री की योनि का बल पूर्वक विच्छेद
आपको तो स्मरण होगी अरुणा शानबाग
या धुंधला गयी है आपके कानून की याद !

मी लार्ड!

‘जर जोरू जमीन ज़ोर की
नहीं तो किसी और की’
गली-मोहल्ला-चौराहे यही किस्सा है
बलात्कार हमारी आदतों का हिस्सा है
बलात्कार का फलां केस ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ है
आई ऑब्जेक्ट मी लार्ड! आपकी यह बात कितनी फेयर है ! ! !

फूलन देवी बन जाओ

औरतों पर बनने वाली खबरें कभी बासी नहीं होती ।

ताज़ा खबर है –
एक आदमी की ‘हत्या के शक’ में
भीड़ ने एक औरत के कपड़े फाड़ दिये
बाज़ार के बीचों बीच निर्वस्त्र दौड़ाया
सबने उसे ढोल की तरह पीटा
फिर सरेआम घसीटा
सुना है वह महिला ‘रेड लाइट एरिया’ से थी ।

उफ़्फ़ ! समाज का इस तरह भीड़ में बदल जाना कितना भयावह है ।

बहरहाल, समाज का कोई ठेकेदार ब्यौरा देगा !
कितने बलात्कारियों,
कितने दहेज लोभियों
कितने एसिड अभियुक्तों
और कितने ‘ऑनर किलिंग’ करने वालों को
भीड़ से भि-न-भि-ना-ती हुई सड़क पर पीटा गया है ?
नंगा कर इस तरह खुले आम घसीटा गया है ??

क्या हमारे समाज का समस्त बाहुबल केवल एक महिला के लिए है ?

सुनों लड़कियों,
फफूंद लगा हुआ यह समाज नहीं बदलने वाला
लेकिन तुम बदल सकती हो ! इसलिए
पति छोड़ देगा ?
परिवार की बदनामी होगी ?
बहनों से ब्याह कौन करेगा ?
इस नैतिक-अनैतिक के फेर में तुम मत पड़ो
तुम उतार फेंको संस्कारों का लिहाफ़

साथियों तुम खड़ी हो जाओ इस सड़ी हुई व्यवस्था के खिलाफ ।

तुम बदल डालो इस समाज के एकतरफा नियम-कानून
जब ‘न्याय का दिन’ होगा तुम भी
इन उन्मत्त बाहुबलियों के वस्त्र नोचना
ट्रैफिक से रेंगती हुई सड़क पर
इन्हें नंगा करके पीटना, मैला खिलाना
लोहे की गर्म सलाखों से गोदना
इनके बेलगाम यौनागों को कंकड़-पत्थर से भर देना

तुम थूकना इन पर जब तक इनके भय से खाली न हो जाओ ।

तुम डरना मत जबकि,
तुम्हारे साहस को अपराध माना जाएगा
तुम्हारी हिम्मत को हिमाक़त समझा जाएगा
तुम्हें चौराहे पर लटका दिया जाएगा
और तुम्हारी गिनती कभी शहीदों में नहीं होगी
क्योंकि साहसी औरतों की समाधि पर
पूजा के नहीं लानत के फूल बरसाए जाते हैं

लेकिन तुम डटी रहना जब तक इनके हौंसले न उखड़ जाएं।

अकेली औरत कहाँ जाएगी ! क्या करेगी !
यदि ऐसा कोई ख़्याल मन में है
तो भीख मांग लेना
लेकिन इस समाज की एक भी गाली
और एक भी उलाहना मत सहना
तुम जियो और जीवन के गीत गाओ
तुम बंजर में उम्मीद का फूल खिलाओ

स्मरण रखो संकल्प ही मनुष्य का सबसे बड़ा साहस है ।

बहनों आगे बढ़ो
संगठित बनो ! संघर्ष करो ! अडिग रहो !
अपने हिस्से का एक इंच टुकड़ा भी
छीन लो इस लम्पट व्यवस्था से
इस दुनिया से अंतिम विदा लेने से पूर्व
‘दुनिया की सब औरतों एक हो जाओ’
और यदि जरूरत पड़े तो इस धरती को लहू से भर दो

सुनो ! फूलन बन जाओ सब की सब ..
पुरूष सत्ता की बुनावट में तुम्हारा यह दखल कीलें ठोक देगा ।