‘टाइम’ की लिस्ट में शामिल शाहीन बाग की दादी बिलकिस बानो बनीं प्रतिरोध का प्रतीक

बिलिकस बानो, टाइम 100 प्रभावशाली

मेरा रंग डेस्क

भारत में एक 82 साल की बुजुर्ग महिला पूरी दुनिया में प्रतिरोध का सशक्त प्रतीक बन जाती है। बिलकिस बानो, जिन्हें ‘शाहीन बाग़ की दादी’ के नाम से भी लोग जानते हैं, उनको टाइम मैगज़ीन ने 2020 के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक नामित किया है। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली अंतर्राष्ट्रीय मैगजीन ‘टाइम’ ने इस साल दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची जारी की है। इस सूची में पीएम नरेंद्र मोदी, आयुष्मान खुराना और गूगल के सीइओ सुंदर पिचाई भी शामिल हैं। ‘टाइम’ की इस साल की 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर से जगह दी गई है।

बिलकिस सीएए-एनआरसी के विरोध में खड़ी उन तमाम महिलाओं में से एक थीं जो इस नए कानून के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं। बिलकिस उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली हैं। उनके पति अब नहीं रहे, वे खेतिहर मजदूर थे। बिलकीस फिलहाल दिल्ली में अपने बहू-बेटों के साथ रहती हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा था कि वे इसमें तब तक हिस्सा लेती रहेंगी जब तक उनकी नसों में एक बूंद भी खून बाकी है। उन्होंने कहा कि वे इस विरोध प्रदर्शन में इसलिए हिस्सा ले रही है ताकि देश व दुनिया के बच्चे समता व न्याय की खुली हवा में सांस ले सकें।

हाशिए की आवाज़

जर्नलिस्ट और ‘गुजरात फाइल्स’ की लेखिका राना अय्यूब टाइम पत्रिका में लिखती हैं, “जब मैं पहली बार बिल्किस से मिली, तो वह एक भीड़ के बीच बैठी थी, जो उन युवतियों से घिरी हुई थी, जो विरोधाभासी स्थिति में विरोध प्रदर्शन कर रही थीं- उनके एक हाथ में प्रार्थना की माला थी और दूसरे हाथ में राष्ट्रीय ध्वज। बिलकिस भारत में हाशिए की आवाज़ बन गईं, एक 82 वर्षीय औरत जो सुबह 8 बजे से आधी रात तक धरना स्थल पर बैठी रहती है।”

बिलकिस बानो ने कहा था, मेरे बच्चों का इस देश से बाहर निकाला जा सकता है जो कि उनका घर है, मैं आराम से कैसे बैठ सकती हूं?

वे आगे लिखती हैं, “कड़ाके की ठंड में भी प्रदर्शन जारी रहा। तब से वे वहां बैठी थीं। बिलकिस, हजारों महिलाओं के साथ, जो शाहीन बाग में उनके साथ शामिल हुईं, एक ऐसे राष्ट्र में प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं, जहां शासन के राजनीति इरादों के जरिए महिलाओं और अल्पसंख्यकों की आवाज़ों को व्यवस्थित रूप से बाहर किया जा रहा था। बिल्किस उन सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं के लिए उम्मीद और ताकत बन गईं, जो मौजूदा सत्ता की नीतियों के खिलाफ खड़े होने पर सलाखों के पीछे फेंके जा रहे थे।”

टाइम 100 की सूची में शामिल होने पर बानो ने मीडिया से कहा कि जिस कानून के विरोध में वह धरने पर बैठी थी, आज उस विरोध को अहमियत देते हुए दुनिया ने शाहीन बाग का सजदा किया है। यूपी के हापुड़ जिले में अपने रिश्तेदार के घर गईं बिलकीस ने कहा कि मैं अब भी मोदी सरकार से सीएए को वापस लेने की अपील करती हूं। उन्होंने कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं, इसलिए कोरोना संकट आने के बाद ही खुद प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया।

बानो ने इससे पहले कभी किसी राजनैतिक आंदोलन में भाग नहीं लिया था। वे एक घरेलू महिला हुआ करती थीं। उन्होंने बताया कि पहले कभी अपना घर छोड़कर वे बाहर नहीं निकली थीं। लेकिन इस प्रदर्शन में उनका खाना सोना धरना स्थल पर ही होता था।

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टाइम पत्रिका की सूची में चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन को भी जगह मिली है। इनके अलावा अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन, अमेरिका में उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और दुनिया के कई अन्य नेता शामिल हैं। इस सूची में अमेरिकी विशेषज्ञ एंथोनी फॉसी का भी नाम है। कोरोना महामारी के दौरान एंथोनी बहुत चर्चा में रही है।

English summery

  • An 82-year-old woman in India becomes a strong symbol of resistance throughout the world. Bilkis Bano, also known as ‘Shaheen Bagh’s grandmother’, has been named one of the most influential people of 2020 by Time magazine. The world’s most prestigious international magazine Time has released a list of 100 influential people of the world this year.