कैसे ऑस्कर हासिल किया मासिक धर्म के मुद्दे पर बनी डाक्यूमेंट्री ‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ ने


डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period End of Sentence) को शार्ट डाक्यूमेंट्री की कैटेगरी में ऑस्कर का खिताब (Oscar award) मिला है। यह फिल्म हापुड़ की रहने वाली लड़कियों पर तैयार की गई है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय के प्रति लोगों को जागरुक करती है।

इस कैटेगरी में ‘ब्लैक शीप’, ‘एंड गेम’, ‘लाइफबोट’ और ‘ए नाइट इन द गार्डन’ जैसी फिल्में भी नामांकित थीं। निर्देशक ने इस फिल्म के माध्यम से भारत में मासिक धर्म को एक वर्जित मुद्दा माने जाने पर रोशनी डालता है और इस बारे में चल रहे जागरुकता संबंधी प्रयासों में जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों की बात करता है।

‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period End of Sentence) का निर्देशन रेका ज़ाताबची (Rayka Zehtabchi) ने किया है और फिल्म की निर्माता गुनीत मोंगा (Guneet Monga) हैं। यह डाक्यूमेंट्री फिल्म द पैड प्रोजेक्ट का एक हिस्सा थी, जो लॉस एंजिल्स के ओकवुड स्कूल के छात्रों और उनके शिक्षक मेलिसा बर्टन की एक पहल थी।

करीब 25 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म मासिक धर्म से जुड़ी शर्म और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म में महिलाओं के एक समूह को सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन दी जाती है। जिसका आविष्कार अरुणाचल के मुरुगनाथम ने किया था और जिनके जीवन में अक्षय कुमार अभिनित फिल्म पैड मैन आई थी। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म में महिलाएं घर-घर जाती हैं, सैनिटरी पैड बेचती हैं और मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करती हैं।

क्या है फिल्म की थीम?


डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period End of Sentence)

यह शार्ट डाक्यूमेंट्री फिल्म उन महिलाओं के जीवन का दस्तावेज तैयार करती है जो मासिक धर्म से जुड़े सोशल टैबू का सामना करती हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि वे कैसे इस टैबू का सामना करती हैं और खुद को किस तरह सशक्त बनाती हैं। वे एक ऐसा वातावरण में जी रही हैं जो स्वास्थ्यप्रद नहीं है। जहां उनकी सैनिटरी पैड तक पहुंच नहीं है।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे पीरियड्स की वजह से महिलाओं को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है और मासिक धर्म के झटकों के कारण वे सामान्य गतिविधियों में भाग नहीं ले सकती हैं। गाँव में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगने के बाद महिलाएँ आखिरकार खुद को सशक्त बनाती हैं। महिलाएँ अपने समुदाय का सशक्तिकरण करते हुए पैड्स का निर्माण और वितरण करना सीखती हैं। वे अपने ब्रांड का नाम FLY रखती हैं।

फिल्म की निर्माता गुनीत मोंगा के बारे में

गुनीत मोंगा एक भारतीय फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उनकी पहचान अनूठे और उन प्रोजेक्ट पर फिल्में बनाने के लिए होती है जो आम तौर पर मुख्यधारा से काफी अलग होते हैं। उनका BAFTA के लिए नामिनेशन हो चुका है। मोंगा ने गैंग्स ऑफ वासेपुर – भाग 1, पेडलर्स, द लंचबॉक्स, मसान और जुबान जैसी उल्लेखनीय फिल्मों का निर्माण किया है।

गुनीत इस प्रोजेक्ट के बारे में बताती हैं, “यह सात साल पहले पैसे जुटाने और एक पैड मशीन दान करने के साथ शुरू हुआ… फिर मैंने सोचा कि टीम को जागरूक करने के लिए एक फिल्म बनानी चाहिए। भारत से एक्शन इंडिया ने मशीन लगाने के लियेजमीन दिलाई। रेका ज़्हाताबची और सैम डेविस ने सिक्किम एंटरटेनमेंट के लिए मंदाकिनी कक्कड़ के साथ इस सब को इतनी खूबसूरती से कैप्चर किया। “

निर्देशक रेका ज़ाताबची का वक्तव्य

रेका ज़ाताबची (Rayka Zehtabchi) ने कहा: “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मासिक धर्म पर एक फिल्म ने ऑस्कर जीता है।” अपने एक इंटरव्यू में वे कहती हैं, “मैंने इस कहानी को नहीं चुना, इस अनोखी कहानी ने ही मुझे चुना है। जब मैं इस फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी संभालने जा रही थी तो इसके पहले पृष्ठभूमि में काफी कुछ हो चुका था। यह निःसंदेह मेरे लिए एक स्पेशल प्रोजेक्ट था।”


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