‘नैना’ एक मशहूर न्यूज़ एंकर की हत्या, महत्वाकांक्षा और शॉर्टकट्स की कहानी

Naina a novel by Sanjeev Paliwal

प्रियंका ओम

पहली नज़र में यह उपन्यास आपको एक मर्डर मिस्ट्री लगता है लेकिन जब आप पढना शुरू करते हैं तब यह मीडिया घराने की परतें उघारता प्रतीत होता है जिससे लगभग सभी पूर्व परिचित है और उपन्यास के मध्य में यह दोनों बातें आपस में गड्ड मड्ड हो जाती हैं। अंततः कातिल मिलता है और मर्डर मिस्ट्री सॉल्व होती है। कातिल कौन है इसका अंदाज़ा एक समझदार पाठक अंत से पहले मालूम कर लेता है।

अंत का अंदाजा लगने के बाद किताब में दिलचस्पी कम होने लगती है। काले अक्षर बोझिल लगने लगते है और तमाम पन्ने उबाऊ। ऐसे में पाठक अपनी इंटेलिजेंस को प्रमाणित करने के लिए सीधे अंत पर पहुँच खुश हो जाता है! एक मुकम्मल उपन्यास होने के बाबजूद कुछ दृश्य ठुंसे हुए लगते हैं। जैसे नैना के पति सर्वेश का अपनी नग्न तस्वीरें उतारना और अन्य लडकियों को भेजना और अंत में अचानक से एक लड़के का आना जो चोरी छुपे नैना को अपने मोबाइल कैमरे से फिल्माता रहता है। हालांकि यह प्लॉटिंग मर्डर मिस्ट्री सॉल्व करने के लिए की गई थी यह आप ही ज़ाहिर हो आता है !

भाषाई तौर पर यह उपन्यास संतुष्ट करता है, क्यूंकि यह आधुनिक युग की कहानी है तो भाषा भी अनुरूप ही है !

अमूमन मैं किसी संग्रह या उपन्यास की समीक्षा नहीं लिखती। मैं यह मानती हूँ कि मैं सिर्फ कहानियां ही लिख सकती हूँ। लेकिन उपन्यास ने मुझे खुद पर लिखने का इतना दबाब डाला कि मैं स्वयं को रोक नहीं पाई। शायद विषय भी मेरी पसंद का है। मुझे हमेशा से व्यावसायिक सफलता के लिए स्त्रियों का देह इस्तेमाल खलता रहा है और शायद यही वजह है की मैं खुद को रोक नहीं पाई।

मुझे प्रोटेगॉनिस्ट नैना, हैरानजदा छोड़ देती है, कोई स्त्री इतनी बोहेमियन कैसे हो सकती है? इतनी काम्प्लेक्स, इतनी कांप्लीकेटेड… मेरा तो सर झन्ना गया।

कहानी शुरू होती है नैना के व्यावसायिक वैभवता के वितचित्र से फिर धीरे –धीरे बखिया खुलने लगती है। उसका चरित्र एक शातिर स्त्री रूप में उभर कर आता है जो पुरुषों का इस्तेमाल करना बखूबी जानती है, वह जानती है जहाँ से पुरुष स्वयं को मज़बूत समझता है दरअसल वही उसकी कमजोरी है। पुरुष का पुरुष होना ही उसकी कमजोरी है और नैना इसका फायदा उठाती है !

नैना की जिंदगी में चार पुरुष है, उपन्यास में चौथे पुरुष का खुलासा अंत से कुछ वक़्त पहले होता है और पाठक को लगने लगता है यही कातिल है जबकि ऐसा नहीं है!

खैर, नैना के जीवन का पहला पुरुष उसका पति है, सर्वेश सिंह देव। सर्वेश उसके बचपन की मोहब्बत है, कॉलेज में साथ पढ़े और जल्द ही शादी कर माँ बन गई। फिलहाल दोनों में पति पत्नी के सम्बन्ध जैसा कुछ नहीं है और दोनों अलग-अलग कमरों में सोते हैं। नैना का अपने पति से डिटैच्ड होने का कारण सर्वेश का अपनी नग्न तस्वीरें उतारना एवं अन्य लड़कियों से शेयर करना दिखाया गया है। हलाकि यह एक मानसिक रोग है जिसका इलाज़ भी संभव था लेकिन नैना के लिए यह इस रिश्ते से एग्जिट-वे था। आज़ादी था!

दूसरा पुरुष है तलाकशुदा नवीन शर्मा जिससे वह इमोशनली अटैच्ड तो है लेकिन उससे प्रेम नहीं करती, नवीन एक अतिभावुक इंसान है। वह नैना की दोस्ती को प्रेम समझता है। वह बार बार इस बात पर जोर देता है की नैना उससे अपने पीरियड्स के डेट भी शेयर करती है और सर्वेश के साथ अपने सेक्सुअल सम्बन्ध भी।हालांकि इन दोनों के बीच शारीरिक समबन्ध नहीं था! नवीन शर्मा का नैना के लिए प्रेम मानसिक था जबकि नैना उसका इस्तेमाल कर रही थी, उसे इमोशनल फूल बना रही थी !

तीसरा पुरुष है गौरव वर्मा। जिससे उसके शारीरिक संबंध है जिसकी पहल नैना ने की थी। नैना इस रिश्ते में प्रेम का दावा करती है और गौरव इनकार। नैना ने गौरव के लिये अपनी देह का इस्तेमाल किया। वह इस रिश्ते को प्रेम का जामा पहनाकर गौरव को कंट्रोल करती है जबकि गौरव अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में खुश है और उससे बाहर नही निकलना चाहता। वह चतित्र एक कैसानोवा का है। नैना के बाद उसका अगला टारगेट आमना नाम की नई लड़की है। वह प्रेम नही जानता सिर्फ देह की भाषा समझता है। हाँ, ज़बरदस्ती भी नही करता। वह अपने हैंडसम लुक और उच्च ओहदे का फायदा लड़कियों को मैनिपुलेट करता है। बड़े संस्थानों में यह आम बात है यह हम सभी जानते हैं।

नैना इतनी शातिर है कि चैनल में दो शीर्षस्थ पुरुषों को अपने मायाजाल में फंसाकर सफलता की सीढियां चढ़ती जाती है। इसका अर्थ यह कतई नहीं कि उसमें काबिलियत नहीं थी बल्कि अपनी काबिलियत के दम पर भी वह चुनी गई थी लेकिन फिर भी सफलता के लिए उसने शॉर्टकट अपनाया, वह शुरू से शातिर भी नहीं थी, वह तो पति के प्रेम में पगी एक मासूम स्त्री थी जिसे मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में सर्वेश खीच लाया था और वह उसी से दूर होकर अपनी मासूमियत खो देती है!

उसकी जिंदगी मे चौथा पुरुष है राजा साहब, एक मंत्री है। नैना उनसे कहती है वह इस रिश्ते से प्रेम की उम्मीद मत करें, लेकिन जब उसे पता चलता है कि वह प्रेग्नेंट है तो तात्कालिक अपने सारे दुख दर्द भूल राजा साहब को बताती है कि वह माँ बनने वाली है। राजा साहब भी बड़े ही सरलता है कहते हैं – मुझे यकीन है यह मेरा नही !

इस उपन्यास में नैना, कॉर्पोरेट में कार्यरत महत्वाकांक्षी आधुनिक स्त्री का काम्प्लेक्स चित्रण संजीव जी ने इतनी सहजता से किया है कि एकबारगी हम चौंक जाते हैं, शायद इसलिए भी कि संजीव जी ने इस दुनिया और नैना को करीब से जाना होगा।

लेखक अपनी रचना में अपनी सोच और अपने विचार ही लिखता है। या यूँ कहें अपनी रचना के माध्यम से वह अपने वह विचार प्रकट करता है जिसे आमतौर पर जाहिर करना सहज नहीं | संजीव जी ने अपने उपन्यास के माध्यम से कहा है “अति महत्वाकांक्षी स्त्रियाँ पुरुषों का ठीक तरह से इस्तेमाल करना सीख गई हैं!”

स्त्री मनोभावों को इतनी बारीकी से समझने और लिखने के लिए संजीव जी को बधाई!

प्रियंका ओम नई पीढ़ी की चर्चित कथाकारों में से एक हैं। उनका संग्रह ‘वो अजीब लड़की’ काफी चर्चित रहा है। उनके दूसरे संग्रह का शीर्षक है ‘मुझे तुम्हारे जाने से नफरत है’। वे इन दिनों तंजानियां में रहती हैं।